फिल्मों के विलेन जैसा मुख्तार की धमकियों का पैटर्न:लोगों की पत्नियों-बच्चों की जानकारी रखता; कहता

फिल्मों के विलेन जैसा मुख्तार की धमकियों का पैटर्न:लोगों की पत्नियों-बच्चों की जानकारी रखता; कहता- कहिए तो बेटी का अच्छे स्कूल में एडमिशन करवा दूं

2 महीने पहलेलेखक: राजेश साहू

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अतीक-अशरफ का चैप्टर बंद होने के बाद अब मुख्तार अंसारी पर फोकस है। 22 सितंबर 2022 को मुख्तार को 7 साल की सजा मिली। अगले ही दिन दूसरे मामले में 5 साल की सजा मिली। ठीक 84 दिन बाद MP/MLA कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई। 3 मामलों में सजा होने के बाद आज चौथे मामले में उसे फिर 10 साल की सजा हुई है।

आज हालत यह है कि मुख्तार के ही बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी कहते हैं, “अतीक के बाद अब मुख्तार का नंबर है, लेकिन मारने वाले से बचाने वाला बड़ा है।” मुख्तार की क्राइम कहानियां तो आप जानते ही हैं। इसलिए आज हम उसकी धमकी देने के पैटर्न को जानेंगे। ट्रायल नहीं पूरा होने देने की कोशिशों को जानेंगे। सबसे पहले व्हील चेयर वाला नाटक जानते हैं।..

10 करोड़ की रंगदारी नहीं मिली तो जान से मारने की धमकी दी

मुख्तार ने फोन कर एक बिल्डर से 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी। रंगदारी नहीं मिलने पर बिल्डर को जान से मारने की धमकी दी।

मुख्तार ने फोन कर एक बिल्डर से 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी। रंगदारी नहीं मिलने पर बिल्डर को जान से मारने की धमकी दी।

2017 में प्रदेश के अंदर बीजेपी की सरकार बनने के बाद मुख्तार की मुसीबतें बढ़ गई। वह किसी भी कीमत पर यहां की जेल से बाहर जाना चाहता था। जनवरी 2019 में कामयाब हो गया। मुख्तार ने पंजाब के नंबर से पंजाब के ही बिल्डर उमंग को फोन कर 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी। रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। उमंग ने शिकायत दर्ज करवाई तो पंजाब पुलिस ने मोहाली में मामला दर्ज कर लिया।

केस दर्ज हुआ तो पुलिस प्रोडक्शन वारंट लेकर यूपी आ गई। यहां आने से पहले न तो ये जांचा गया था कि वो फोन मुख्तार ने किया या फिर किसी और ने। न ही उस ऑडियो से मुख्तार की आवाज मैच करवाई गई। बांदा कोर्ट से पंजाब पुलिस ने परमिशन ली और 21 जनवरी 2019 को उसे लेकर पंजाब पहुंच गई। कोर्ट में पेश किया फिर वहीं रोपड़ जेल मुख्तार का नया ठिकाना बन गया।

मुख्तार को यूपी भेजने के लिए 40 बार मना कर दिया गया
मुख्तार यहां से तो आसानी से चला गया लेकिन उसे दोबारा यूपी लाने के लिए यूपी पुलिस को जमकर मेहनत करनी पड़ी। कुल मिलाकर 40 बार किसी न किसी बहाने से पंजाब सरकार ने मना कर दिया। इसमें दर्जनों बार तो पंजाब पुलिस ने मुख्तार को मेडिकल अनफिट बताकर यूपी नहीं भेजा। मेडिकल में दिखाया जाता कि वह डायबिटीज और बीपी का मरीज है। एक बार तो डिप्रेशन को भी वजह बताई गई।

2 साल तक व्हील चेयर पर चलने का नाटक किया
मुख्तार के ज्यादातर अपराध यूपी में थे इसलिए उसकी यहां पेशी होनी थी। लेकिन पुलिस मुख्तार को लाने में सफल नहीं हो पा रही थी। दो साल बाद फाइनली सफलता मिली और 7 अप्रैल 2021 को मुख्तार को यूपी लाने की डेट फाइनल हुई। यूपी पुलिस की एनकाउंटर छवि को देखते हुए मुख्तार ने नाटक किया। व्हील चेयर के जरिए एंबुलेंस पर सवार हुआ। अधिकारियों को लगा कि बीमार है लेकिन जैसे ही वह बांदा जेल पहुंचा वहां वह व्हील चेयर से उठा और अपने कदमों से चलते हुए बैरक नंबर 16 में चला गया।

इस बात की चर्चा करते हुए STF प्रमुख अमिताभ यश एक इंटरव्यू में कहते हैं, मुख्तार ने व्हील चेयर के नाम पर नाटक किया था। यह नाटक उसका दो साल से चल रहा था। अब ऐसा तो था नहीं कि बांदा के पानी में कुछ ऐसा हो जिससे वह यहां पहुंचते ही उठकर चलने लगा हो।

यूपी में आने से पहले मुख्तार ने 2 साल तक व्हील चेयर पर चलने का नाटक किया।

यूपी में आने से पहले मुख्तार ने 2 साल तक व्हील चेयर पर चलने का नाटक किया।

यूपी पुलिस नहीं लाती तो सजा भी नहीं होती
अमिताभ यश कहते हैं, अवधेश राय मर्डर को 32 साल हो गए थे। लेकिन ट्रायल नहीं पूरा हुआ। ऐसे अपराधों में ट्रायल न पूरा हो इसलिए ये (मुख्तार) पंजाब शिफ्ट हो गए थे। यूपी पुलिस जब इसे यहां लेकर आई तो ट्रायल पूरा हुआ और उसी का नतीजा रहा कि इसे अलग-अलग मामलों में तीन बार सजा हुई। अगर नहीं लाया जाता तो यह भी तय था कि किसी भी मामले में मुख्तार को सजा नहीं होती।

यहां मुख्तार की कहानी में थोड़ा ब्रेक लेते हैं, अब सवाल है कि क्या सारे माफिया केस में ऐसा ही करते हैं?

गवाही रोकने के लिए कोर्ट में हड़ताल करवा दी थी
अमिताभ यश बताते हैं, “न सिर्फ मुख्तार बल्कि हर माफिया अपने मामलों में ऐसा ही करवाता है। ये लोग गवाहों को अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश करते हैं। इसके लिए धमकाते हैं, पैसे का लालच देते हैं। जब वह मान जाता है तो वकील से जल्दी-जल्दी तारीखें लगवाकर बरी हो जाते हैं। लेकिन जहां ऐसा नहीं चलता वहां लेट करते हैं।” अमिताभ, अतीक अहमद से जुड़े एक मामले को लेकर बताते हैं, जैद नाम के व्यक्ति की गवाही होनी थी। उसकी गवाही न हो इसके लिए अतीक पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में हड़ताल करवा दी।

तस्वीर में बाईं तरफ STF चीफ अमिताभ यश हैं। इन्होंने अपने करियर में 150 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं।

तस्वीर में बाईं तरफ STF चीफ अमिताभ यश हैं। इन्होंने अपने करियर में 150 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं।

एसटीएफ चीफ बताते हैं, अतीक के इस मामले में 15 मुलजिम थे। इसके लिए माफिया ने 15 वकील कर रखे थे। 24 तारीखें लगी लेकिन कभी गवाहों का क्रॉस एग्जामिशन पूरा नहीं हो सका। क्योंकि कोई न कोई वकील हमेशा छुट्टी पर रहता। या फिर मुलजिम की झूठी बीमारी का मेडिकल लगा देता। इसलिए इन माफियाओं का केस 20-20 साल तक ऐसे ही चलता रहता था। इन माफियाओं को पता है कि अगर कोई गवाही दे दिया और सजा हो गई तो इनका डर खत्म हो जाएगा। उसी डर को बनाए रखने के लिए ही तो ये सब करते हैं।

  • अब फिर से मुख्तार की बात पर लौटते हैं…

धमकी नहीं देता सिर्फ परिवार के बारे में एक-एक जानकारी बताता है
मुख्तार अंसारी के धमकी देने का तरीका बाकी माफियाओं से एकदम अलग है। अमिताभ यश बताते हैं, जब वह जेल में होता है तो जेल के कर्मचारियों से कहता है कि आपकी बीवी फलां स्कूल में पढ़ाती हैं। बहुत अच्छा स्कूल है। बेटा देहरादून में पढ़ता है, आपकी बेटी लखनऊ के इस स्कूल में 8वीं में पढ़ती है। कहिए तो अच्छे स्कूल में करवा दूं। ये बाते लोगों के लिए जरूर नॉर्मल है लेकिन जो व्यक्ति सुरक्षा में लगा है उसका तो हलक सूख जाता है। इसलिए वह मुख्तार जो कहता है वही करने लगता है। मुख्तार ने इन जानकारियों के लिए बहुत सारे लोगों को लगा रखा है।

माफिया सिर्फ धमकी नहीं देता। कई बार वह लालच के जरिए सिस्टम को घुमा देता है। जो अधिकारी जांच में लगे हैं उन्हें पैसा दे दिया। फ्लैट दिलवा दिया। बेटे को नौकरी लगवाने का वादा कर दिया। इन्हीं चीजों को करके यह सिस्टम को घुमाते रहते हैं। अक्सर मामलों में इनकी पहुंच हाई होती है। अधिकारी को जान का खतरा होता है। इसलिए अक्सर माफिया बच जाते हैं। लेकिन जब से प्रशासन सख्त हुआ तब से लोगों में हिम्मत आ गई। अब जल्दी-जल्दी सजा होने लगी।

  • अब आखिर में मुख्तार के कुनबे से जुड़ा ये ग्राफिक देख लेते हैं…

ये तो थी मुख्तार की धमकियों के पैटर्न की कहानी। आगे ये कहानियां और पढ़ सकते हैं।

  • माफिया जो मर्सडीज-BMW के काफिले में चलता, नीदरलैंड से फेसबुक लाइव आया पर पकड़ा नहीं गया

एक माफिया जिसने अपनी हैसियत ऐसी बनाई कि बड़े-बड़े नेता सलाम करते थे। बचपन गरीबी में बीता लेकिन जवानी में हर वो चीज हासिल की जो अमीरों के पास थी। दुनिया तो ऐसे घूमा कि आज तक पुलिस खोज नहीं पाई। पढ़ाई सिर्फ 8वीं तक की लेकिन जवाबों में अक्सर अंग्रेजी होती थी। पत्रकार पूछते- अपराध की दुनिया में क्यों और कैसे आ गए? माफिया विलियम शेक्सपियर को कोट करते हुए जवाब देता- ये दुनिया एक रंगमंच है और हम सब इस रंगमंच की कठपुतलियां हैं।

ये कोई और नहीं बल्कि मेरठ का माफिया बदन सिंह बद्दो है। 3 साल से गायब है। ढाई लाख रुपए का इनामी है। पुलिस देश के साथ विदेश तक ढूंढ रही लेकिन अब तक बदन सिंह मिला नहीं। यूपी सरकार ने हाल ही में 61 माफियाओं की जो लिस्ट जारी की है उसमें इस माफिया का भी नाम है। पढ़ें पूरी कहानी…

  • माफिया जिसे पुलिस गिरफ्तार करने गई तो मुलायम के साथ उड़ गए; 1500 मोबाइल नंबर याद

वाराणसी से करीब 50 किलोमीटर दूर एक गांव है धानापुर। 20 किलोमीटर पहले ही किसी भी रास्ते पर किसी से गांव का पता पूछेंगे तो वह आपको पूरा रास्ता बता देगा। कारण सिर्फ इतना है कि यह गांव विजय मिश्रा का है। 1980 तक विजय राजनीति से दूर थे। ट्रक और पेट्रोल पंप चलाते थे। उस वक्त यूपी के सीएम रहे कमलापति त्रिपाठी विजय मिश्रा से मिले और कहा- “विजय धंधा तो चलता रहेगा। अब राजनीति में आ जाओ।” विजय को बात पसंद आई और तय किया कि अब राजनीति में उतरना है।

भदोही के डीघ ब्लॉक में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव हो रहा था। बाहुबली उदयभान सिंह के खास अभयराज सिंह प्रत्याशी थे। उन्हें एक चौबे जी टक्कर दे रहे थे। 2 वोट से चुनाव अभयराज जीत गए। इसके बाद जो जश्न हुआ उसमें नारे तो लगे ही लेकिन उससे ज्यादा ब्राह्मणों को टारगेट किया गया। पढ़ें पूरी कहानी…

डकैत गौरी यादव एनकाउंटर के आखिरी 60 मिनट, IPS अमिताभ बोले- बीहड़ के आखिरी डकैत को 50 फीट पास जाकर मारा

साल था 1976…चित्रकूट के छोटी बिलहरी गांव के बेहद गरीब परिवार में बेटा पैदा हुआ। पिता बाबू प्रसाद यादव भगवान शिव के भक्त थे। उन्होंने बेटे का नाम गौरी शंकर रखा। बच्चा ढाई साल का हुआ तभी बाबू प्रसाद की मौत हो गई। मां राजरानी ने मजदूरी करके गौरी शंकर को पढ़ाया-लिखाया। 10वीं पास करके गौरी सेना में जाने के सपने देखने लगा। सेना भर्ती का फॉर्म भरा, तैयारी भी की। फिर कानपुर जाकर भर्ती में दौड़ भी लगाई, लेकिन सिलेक्ट नहीं हुआ। हताश गौरी घर लौट आया।

जिस डकैत को लोकल पुलिस 10 साल तक देख भी नहीं पाई। उसे महज 50 फीट करीब जाकर कैसे ढेर किया गया। एनकाउंटर का पूरा किस्सा IPS ऑफिसर अमिताभ यश ने भास्कर को बताया। पढ़िए पूरी कहानी…

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