जजो को सेंसटिव हार्ट और अलर्ट माइंड की जरूरत:दिल्ली HC ने 15 साल पुराने रेप केस मामले में की टिप्पणी, आरोपी बरी

नई दिल्लीएक महीने पहले

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कोर्ट में काउंसलर से गवाह के रूप में पूछताछ की गई, जिससे बच्ची की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट की जानकारी बाहर आ गई। - Dainik Bhaskar

कोर्ट में काउंसलर से गवाह के रूप में पूछताछ की गई, जिससे बच्ची की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट की जानकारी बाहर आ गई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने जजों से कहा कि गवाहों के बयान दर्ज करने और बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई करते समय सेंसिटिव हार्ट और अलर्ट माइंड रखने की जरूरत है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, राज्य सरकार व प्रशासन कोर्ट को जरूरी और मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर तो दे सकता है, लेकिन जज को संवेदनशील दिल नहीं दे सकता।

जज को खुद ही सेंसिटिव हार्ट डेवलप करना होगा, ताकि यौन उत्पीड़न के दौरान बयान दर्ज करते समय दिमाग सतर्क हो। इससे मुकदमे को एक ही डायरेक्शन में न मोड़ा जा सके। ऐसा उन्होंने 15 साल पुराने यौन उत्पीड़न के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा।

दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने संजीव कुमार नाम के व्यक्ति को नाबालिग लड़की के रेप के केस में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में केस को लेकर अपील की थी।

नाबालिग लड़की के रेप केस का पूरा मामला समझिए…
नाबालिग लड़की के वकीलों ने कोर्ट में कहा था कि 24 अप्रैल 2008 को विक्टिम अपने माता-पिता के साथ राजस्थान के मेंहदीपुर बालाजी से दिल्ली के नांगली पुना में हनुमान मंदिर के दर्शन के लिए आई थी। इस दौरान उसके माता-पिता मंदिर में दर्शन के लिए गए और वह मंदिर के बाहर सामान की रखवाली कर रही थी।

इसी बीच कार सवार दो लोग वहां आए और कार चालक ने उसे कार में अंदर खींच लिया। अपीलकर्ता संजय और एक अन्य व्यक्ति पर आरोप लगाया गया कि दोनों ने 12 साल की नाबालिग लड़की का रेप किया और दो घंटे बाद मंदिर के बाहर छोड़ दिया। नाबालिग लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर संजीव व नरेश को गिरफ्तार किया।

ट्रायल कोर्ट ने साल 2010 में सुनाई 10 साल की सजा
इसके बाद मामला ट्रायल कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट ने सितंबर 2010 में विक्टिम के बयान के आधार पर संजीव व नरेश को अपहरण व रेप सहित अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया। दोनों को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई, जिसके बाद संजीव ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

मई 2021 में संजीव की हुई मौत, पत्नी ने जारी रखी सुनवाई
15 मई 2021 को संजीव की मौत हो गई, लेकिन उनकी पत्नी केस लड़ती रहीं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने 1 मई 2023 को हुई सुनवाई में पाया कि जिस काउंसलर ने केस के दौरान 12 साल की बच्ची की काउंसिलिंग की थी, उससे बचाव पक्ष ने गवाह के रूप में पूछताछ की, जिससे बच्ची की काउंसिलिंग से जुड़ी कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में आ गई। कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट में विक्टिम ने अपने पिता द्वारा यौन शोषण करने का जिक्र किया था। साथ ही विक्टिम ने रेप को लेकर अलग-अलग बयान दिए थे।

कोर्ट ने कहा कि हम 12 साल के बच्ची की उस बेचैनी को महसूस कर सकते है कि जो वो अपने पिता के सामने महसूस कर रही होगी। साथ ही बच्ची पर पीटे जाने का दबाव भी था, जिसके चलते उसने पहले आरोपियों द्वारा शोषण किए जाने की बात कही थी। कोर्ट ने आगे कहा कि नाबालिग लड़की के वकीलों ने संजीव के खिलाफ जो सबूत दिए थे वो उसे दोषी करार देने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए उसे बरी किया जाता है।

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