खराब मौसम के कारण रोकी गई चारधाम यात्रा:केदारनाथ में भारी बर्फबारी, बारिश से सड़क पर जमा मलबा, श्रीनगर में रुके हुए हैं यात्री
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खराब मौसम के कारण रोकी गई चारधाम यात्रा:केदारनाथ में भारी बर्फबारी, बारिश से सड़क पर जमा मलबा, श्रीनगर में रुके हुए हैं यात्री

श्रीनगर2 महीने पहले

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कोतवाली चमोली क्षेत्र के बाजपुर में पहाड़ी से मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया है - Dainik Bhaskar

कोतवाली चमोली क्षेत्र के बाजपुर में पहाड़ी से मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया है

केदारनाथ और बद्रीनाथ में भारी बर्फबारी हो रही है। वहीं निचले इलाकों में बारिश के कारण सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर जमा हो गए। जिसके चलते देर रात चार धाम यात्रा रोक दी गई। यात्रियों से आस-पास के शहरों में रहने की अपील की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, एनआईटी उत्तराखंड के पास और बद्रीनाथ बस स्टैंड के पास जहां चार धाम यात्रियों को रोका जा रहा है, वहां चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं।

एसएचओ श्रीनगर, रवि सैनी ने कहा, श्रीनगर गढ़वाल में पुलिस ने एनआईटी उत्तराखंड के पास और बद्रीनाथ बस स्टैंड के पास चेकिंग पॉइंट बनाए हैं जहां चार धाम यात्रियों को रोका जा रहा है और जिन लोगों ने रात ठहरने के लिए ऑनलाइन बुकिंग की है उन्हें रुद्रप्रयाग की ओर जाने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन जिन यात्रियों ने बुकिंग नहीं कराई है। उन्हें पास श्रीनगर में ही रहने की अपील की जा रही है।

पुलिस का कहना है, कि श्रीनगर में ठहरने के पुख्ता इंतजाम हैं, यात्रियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। एक बार जब मौसम साफ हो जाए तो सभी अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं।

तीर्थयात्रियों के लिए जारी की गई है SOP
इससे पहले शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को श्रद्धालुओं को सलाह दी थी कि वे कोविड-19 सहित सभी मेडिकल टेस्ट पास करने के बाद ही तीर्थ यात्रा की योजना बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक SOP जारी की गई है और इस साल तीर्थ यात्रा करने वालों को इसका पालन करने की आवश्यकता है।

यमुनोत्री मंदिर के बारे में मान्यता है कि टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रतापशाह ने देवी यमुना का मंदिर बनवाया था।

यमुनोत्री मंदिर के बारे में मान्यता है कि टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रतापशाह ने देवी यमुना का मंदिर बनवाया था।

गुरुवार को खुले कपाट, पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर की गई
गुरुवार सुबह जैसे ही बदरीनाथ धाम के कपाट तीर्थयात्रियों के लिए खुले, पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर की गई। वैदिक श्लोकों के उच्चारण के बीच बदरीनाथ धाम के कपाट खुल गए। पवित्र मंदिर के औपचारिक उद्घाटन को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। गुरुवार सुबह चार बजे कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। अधिकारियों ने बताया कि कुबेर-जी, श्री उद्धव-जी और गाडू घड़ा को दक्षिण द्वार से मंदिर परिसर में लाया गया।

अब चारधाम यात्रा का रोड मैप और उससे जुड़ी जानकारी जानते हैं…

यमुनोत्री

उत्तराखंड के गढ़वाल का सबसे पश्चिमी मंदिर यमुनोत्री है। यमुनोत्री यमुना नदी का उद्गम स्थल है। यह देवी यमुना मंदिर और जानकी चट्टी के पवित्र तापीय झरनों के लिए जाना जाता है। यमुना मंदिर का निर्माण टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह ने करवाया था।

गंगोत्री

उत्तरकाशी में समुद्र तल से 3200 मीटर की ऊंचाई पर गंगोत्री है। यहां पवित्र नदी गंगा का मंदिर है। जहां लोग स्नान के बाद दर्शन करते हैं।

केदारनाथ

भगवान शिव का मंदिर केदारनाथ में है। यह समुद्र तल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां मंदाकिनी नदी है। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ अलकनंदा नदी के बाएं से समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भगवान विष्णु का मंदिर है।

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यमुनोत्री से शुरू होती है उत्तराखंड की चारधाम यात्रा, जानें इससे जुड़ी बातें

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है, इसके बाद भक्त गंगोत्री के दर्शन करते हैं, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम में दर्शन-पूजन के साथ ये यात्रा पूरी होती है। जानिए उत्तराखंड के चार धामों से जुड़ी खास बातें…यहां पढ़ें पूरी खबर…

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले, इलाके में बर्फबारी:प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से अलर्ट रहने को कहा, नौ भाषाओं में SOP जारी की

केदारनाथ और बद्रीनाथ में गुरुवार को बर्फबारी हुई। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे मौसम को देखते हुए अपनी यात्रा का प्लान बनाएं और अलर्ट रहें। उत्तराखंड प्रशासन ने चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नौ अलग-अलग भाषाओं में SOP तैयार की है। इसमें बताया गया है कि मौसम खराब होने पर क्या करें। यहां पढ़ें पूरी खबर…

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